
पावर कॉरिडोर से सीधे ‘फील्ड’ में एंट्री
राजस्थान की राजधानी जयपुर के प्रशासनिक गलियारों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 2011 बैच के अनुभवी आईएएस अधिकारी संदेश नायक ने जयपुर के 53वें जिला कलेक्टर के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। संदेश नायक की यह नियुक्ति इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि वे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में विशेष सचिव के पद से सीधे फील्ड की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने उतरे हैं। एक तरफ जहां निवर्तमान कलेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी को मुख्यमंत्री का सचिव बनाया गया है, वहीं संदेश नायक को सीएमओ के भरोसेमंद अफसर के रूप में जयपुर की कमान सौंपी गई है, जो सत्ता और सिस्टम के बीच एक नई प्रशासनिक केमिस्ट्री का संकेत है।
भरतपुर से जयपुर तक का शानदार सफर
संदेश नायक को राजस्थान के विभिन्न जिलों की भौगोलिक और प्रशासनिक नब्ज पकड़ने का गहरा अनुभव है। वे इससे पहले भरतपुर, चूरू और सिरोही जैसे चुनौतीपूर्ण जिलों में जिला कलेक्टर रह चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रियलिटी पर काम किया है। इसके अलावा, वे जयपुर स्मार्ट सिटी के सीईओ के पद पर भी सेवाएं दे चुके हैं, जिसके कारण उन्हें शहर की बुनियादी समस्याओं, विशेषकर अर्बन मैनेजमेंट और ट्रैफिक की पेचीदगियों की पहले से ही भलीभांति जानकारी है। अनुभव का यही तालमेल उन्हें जयपुर जैसे बड़े और वीआईपी जिले को संभालने में मजबूती प्रदान करेगा।
आमजन की राहत और ट्रैफिक मैनेजमेंट पहली प्राथमिकता
पदभार ग्रहण करने के बाद नए कलेक्टर ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट कर दिया है। संदेश नायक ने संकेत दिए हैं कि दूर-दराज से आने वाले फरियादियों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना उनका मुख्य लक्ष्य होगा। जयपुर शहर के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने ‘ट्रैफिक जाम’ को लेकर उन्होंने विशेष फोकस करने की बात कही है। इसके साथ ही, राजस्व न्यायालयों में लंबे समय से लंबित पड़े मामलों (पेंडेंसी) को कम करना और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना उनकी कार्ययोजना का अहम हिस्सा है। उन्होंने साफ किया कि प्रशासन का रवैया संवेदनशील होगा ताकि आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
नवाचारों की निरंतरता और नई चुनौतियां
डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी के 19 महीने के कार्यकाल के दौरान शुरू हुए ‘रास्ता खोलो अभियान’ और ‘नरेगा आखर अभियान’ जैसे सफल प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाना संदेश नायक के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी होगी। राजधानी होने के नाते जयपुर में हर छोटे-बड़े फैसले पर सरकार और जनता की पैनी नजर रहती है। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा कराना, बंद रास्तों के विवादों को सुलझाना और सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुँचाना उनके कार्यकाल की असली परीक्षा होगी। पदभार ग्रहण समारोह के दौरान अधिकारियों ने उनका स्वागत किया, वहीं अब शहरवासियों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सीएमओ का यह अनुभव जयपुर की सड़कों और सिस्टम में क्या बदलाव लाता है।
