
झालाना स्थित कार्यालय में ‘बम अलर्ट’ से दहशत
राजस्थान की राजधानी जयपुर में सरकारी संस्थानों को निशाना बनाने वाली धमकियों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को झालाना स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय की आधिकारिक ईमेल आईडी पर एक धमकी भरा संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें परिसर को बम से उड़ाने का दावा किया गया था। सूचना मिलते ही पुलिस और एटीएस की टीमों ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और पूरे भवन को तुरंत खाली कराया। पिछले 23 दिनों के भीतर जयपुर पासपोर्ट कार्यालय को मिली यह तीसरी धमकी है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली और शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुरक्षा घेरे के बीच कर्मचारियों की बड़ी लापरवाही
जब बम निरोधक दस्ता (BDS) और डॉग स्क्वॉड की टीमें परिसर के कोने-कोने की सघन तलाशी ले रही थीं, तब वहां एक हैरान करने वाला नजारा देखने को मिला। सुरक्षा प्रोटोकॉल और जान के खतरे के बावजूद, कार्यालय के कुछ कर्मचारी बेखौफ होकर अपना टिफिन खोलकर खाना खाने लगे। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने जब यह देखा तो वे दंग रह गए और तुरंत हस्तक्षेप कर कर्मचारियों को वहां से हटाया। अधिकारियों के अनुसार, ऐसी संवेदनशील स्थिति में टिफिन खोलना या किसी भी वस्तु को छूना एक बड़े खतरे को निमंत्रण दे सकता था, जो प्रशासनिक अनुशासन की कमी को दर्शाता है।
एसीपी के नेतृत्व में चला सर्च ऑपरेशन
एसीपी (गांधीनगर) नारायण बाजिया के नेतृत्व में चले इस सर्च ऑपरेशन में एटीएस और स्थानीय पुलिस की टीमों ने करीब दो घंटे तक गहन छानबीन की। भवन के बेसमेंट से लेकर छत तक और आसपास की झाड़ियों की बारीकी से जांच की गई। राहत की बात यह रही कि पूरी तलाशी के दौरान कोई भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक बरामद नहीं हुआ, जिसके बाद इस धमकी को ‘हॉक कॉल’ (अफवाह) घोषित कर दिया गया। हालांकि, एहतियात के तौर पर पासपोर्ट कार्यालय के बाहर पुलिस जाब्ता तैनात कर दिया गया है और आने-जाने वालों की कड़ी चेकिंग की जा रही है।
साइबर सेल की रडार पर ‘धमकी भरा मेल’
लगातार मिल रही इन धमकियों के पीछे के मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए जयपुर पुलिस की साइबर टीम ने जांच तेज कर दी है। पुलिस अब उन तकनीकी पहलुओं और आईपी एड्रेस को ट्रैक करने की कोशिश कर रही है, जहां से ये मेल भेजे गए हैं। गौरतलब है कि जयपुर के अलावा अलवर और अजमेर के डाकघरों व पासपोर्ट केंद्रों को भी इसी तरह की धमकियां मिली हैं। पुलिस अब राष्ट्रीय जांच एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह किसी संगठित गिरोह की साजिश है या केवल दहशत फैलाने की कोई शरारत।
