
राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने नए साल 2026 के पहले ही दिन भ्रष्टाचार के खिलाफ एक जोरदार प्रहार किया है। सीकर जिले के नीमकाथाना सदर थाने में तैनात हेड कांस्टेबल राजेश कुमार को एसीबी की टीम ने 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। भ्रष्टाचार के खिलाफ हुई इस बड़ी कार्रवाई ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है और यह उन अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो अपने पद का दुरुपयोग करते हैं। इस पूरे मामले की शुरुआत एक शिकायत के साथ हुई थी, जिसमें परिवादी ने एसीबी की सीकर चौकी को अपनी आपबीती सुनाई थी। शिकायतकर्ता ने बताया था कि उसके भाइयों के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज था। इस मुकदमे में उसके भाइयों का नाम मुल्जिम के तौर पर न जोड़ने और उन्हें राहत देने के बदले में हेड कांस्टेबल राजेश कुमार ने मोटी रकम की मांग की थी। आरोपी ने इस काम के लिए कुल 20 हजार रुपये की रिश्वत तय की थी।
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एसीबी महानिदेशक गोविंद गुप्ता के अनुसार, आरोपी हेड कांस्टेबल ने रिश्वत की पहली किश्त के तौर पर 10 हजार रुपये 31 दिसंबर 2025 को ही ले लिए थे। शेष 10 हजार रुपये के लिए वह लगातार परिवादी पर दबाव बना रहा था। परिवादी रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने साहस जुटाकर एसीबी के पास जाकर पूरे मामले की जानकारी दी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से मामले का सत्यापन किया।
शिकायत के सही पाए जाने पर एसीबी मुख्यालय ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए
1 जनवरी 2026 को एसीबी जयपुर के उपमहानिरीक्षक राजेश सिंह के सुपरविजन और सीकर इकाई के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विजय कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने पूरी तैयारी के साथ जाल बिछाया ताकि आरोपी को रिश्वत की राशि के साथ मौके पर ही पकड़ा जा सके। जैसे ही परिवादी ने हेड कांस्टेबल राजेश कुमार को रिश्वत के बाकी बचे 10 हजार रुपये थमाए, वैसे ही पास में तैनात एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। पकड़े जाने के बाद आरोपी के पास से रिश्वत की वह राशि भी बरामद कर ली गई जो उसने परिवादी से ली थी। मौके पर ही गिरफ्तारी की सारी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं और आरोपी को हिरासत में ले लिया गया।
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एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस स्मिता श्रीवास्तव के निर्देशन में अब आरोपी हेड कांस्टेबल से गहन पूछताछ की जा रही है। एसीबी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस रिश्वतखोरी के पीछे थाने के अन्य कर्मचारियों या अधिकारियों की भी कोई मिलीभगत थी। फिलहाल, आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है। नए साल के पहले ही दिन हुई इस कार्रवाई को एसीबी द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनाई जा रही ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। विभाग का स्पष्ट मानना है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे दोषी कोई भी हो। यह कार्रवाई उन आम लोगों के भरोसे को मजबूत करती है जो ईमानदारी से काम होने की उम्मीद रखते हैं और व्यवस्था में सुधार चाहते हैं। प्रशासन की इस मुस्तैदी ने साफ कर दिया है कि सरकारी कर्मचारी अगर जनता को परेशान कर अनुचित लाभ लेने की कोशिश करेंगे, तो उन्हें कानून के शिकंजे से कोई नहीं बचा पाएगा। नीमकाथाना की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि राजस्थान एसीबी भ्रष्ट लोकसेवकों पर नकेल कसने के लिए पूरी तरह सक्रिय है। इस कार्रवाई के बाद इलाके के अन्य सरकारी दफ्तरों में भी सतर्कता बढ़ गई है।
