जयपुर की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने तकनीक का सहारा लेकर लोगों की गाढ़ी कमाई उड़ाने वाले एक बेहद शातिर गिरोह को पकड़ने में बड़ी सफलता हासिल की है। यह गिरोह आम लोगों के मोबाइल फोन हैक कर ई-कॉमर्स वेबसाइटों के जरिए महंगे इलेक्ट्रॉनिक सामान और मोबाइल फोन ऑर्डर करने का काम करता था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अब तक दो शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ में ठगी के इस आधुनिक और जटिल नेटवर्क की कई परतें खुल रही हैं।
पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस गिरोह के तार केवल भारत तक ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी जुड़े हुए हैं। डीसीपी (क्राइम) अभिजीत सिंह के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों की पहचान छत्तीसगढ़ निवासी अमोल चौपड़ा और जयपुर के प्रताप नगर निवासी सक्षम खंडेलवाल के रूप में हुई है। शुरुआती पूछताछ में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि ये आरोपी ठगी के जरिए मंगवाए गए कीमती मोबाइल फोनों को नेपाल के रास्ते दूसरे देशों में भेज देते थे। इस खुलासे के बाद पुलिस अब इस पूरे अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। ठगी करने का इनका तरीका बेहद आधुनिक और तकनीकी था। गिरोह के सदस्य सबसे पहले पीड़ितों को लुभावने या डराने वाले फर्जी (मैलिशियस) लिंक भेजते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक पर क्लिक करता, उसका मोबाइल फोन हैक हो जाता और उसकी निजी जानकारी बदमाशों के पास पहुँच जाती। इसके बाद बदमाश पीड़ित के मोबाइल में मौजूद डेबिट और क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स का उपयोग कर ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर खरीदारी शुरू कर देते थे। इस दौरान वे डिजिटल पहचान चोरी और थर्ड पार्टी ऐप्स का भी सहारा लेते थे।
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इस गिरोह की सबसे बड़ी चालाकी ई-कॉमर्स कंपनियों की ‘तत्काल डिलीवरी’ (Instant Delivery) सेवा का फायदा उठाना था। वे जानते थे कि बड़े शहरों में सामान कुछ ही घंटों में डिलीवर हो जाता है। जब तक पीड़ित व्यक्ति को अपने कार्ड से पैसे कटने का पता चलता और वह बैंक को सूचित कर कार्ड ब्लॉक करवाता, तब तक आरोपी सामान की डिलीवरी प्राप्त कर चुके होते थे। यही कारण है कि यह गिरोह मुख्य रूप से बड़े महानगरों को अपना निशाना बनाता था जहाँ त्वरित डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध है। वारदात को अंजाम देने के बाद ये बदमाश पकड़े जाने के डर से बेहद सावधानी बरतते थे। ठगी के जरिए हासिल किए गए महंगे सामानों को ये छोटे शहरों में कम कीमतों पर बेच देते थे ताकि नकदी का इंतजाम हो सके। पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि गिरोह के भीतर काम का बँटवारा बहुत ही व्यवस्थित तरीके से किया गया था। अलग-अलग शहरों में बैठे अपराधी अपनी पहचान छुपाने के लिए अलग-अलग लोकेशन से काम करते थे ताकि उन तक पहुँचना मुश्किल हो जाए।
वित्तीय लेनदेन के मामले में भी यह गिरोह पुलिस और जांच एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए पुराने तरीकों के बजाय नए दौर की तकनीक का इस्तेमाल कर रहा था। जांच में सामने आया है कि वे आपस में और अन्य अपराधियों के साथ पैसों का लेन-देन क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से करते थे। क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग के कारण पुलिस के लिए पैसों के स्रोत और उसके गंतव्य का पता लगाना एक बड़ी चुनौती बन गया था, क्योंकि इसमें लेन-देन करने वाले की पहचान को पूरी तरह गुप्त रखा जा सकता है। वर्तमान में गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों में से अमोल चोपड़ा को जेल भेज दिया गया है, जबकि सक्षम खंडेलवाल को पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस सक्षम से गहन पूछताछ कर रही है ताकि गिरोह के मुख्य सरगना और अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। पुलिस को अंदेशा है कि यह गिरोह देश भर के सैकड़ों लोगों को अपना शिकार बना चुका है और इसके पीछे किसी बड़ी मास्टरमाइंड टीम का हाथ हो सकता है।
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जयपुर पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराध के बढ़ते खतरों के प्रति एक बड़ी चेतावनी है। विभाग का कहना है कि लोग किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और अपने मोबाइल की सुरक्षा के प्रति सजग रहें। फिलहाल, पुलिस इस गिरोह के बाकी संदिग्धों की तलाश में अलग-अलग राज्यों में छापेमारी कर रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े नाम सामने आएंगे और करोड़ों रुपये की ठगी का हिसाब मिल सकेगा।
