अजमेर शहर में आस्था के दीप और अगरबत्ती की अनदेखी ने एक ही रात में दो बड़े हादसों को जन्म दे दिया, जिससे केके कॉलोनी और तोपदड़ा फाटक क्षेत्र में हड़कंप मच गया। पहली घटना पहाड़गंज स्थित केके कॉलोनी की है, जहाँ प्रदीप ठाकुरानी के घर में बने मंदिर में जलाया गया दीपक रात करीब 9 बजे सीढ़ियों के पास रखे सामान तक फैल गया। लपटें उठती देख क्लॉक टावर थाना पुलिस और दमकल विभाग को सूचित किया गया, जिन्होंने समय रहते पहुँचकर आग को फैलने से रोक लिया। हालाँकि इस घटना में घर का कुछ कीमती सामान जलकर राख हो गया, लेकिन राहत की बात यह रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। पुलिस प्रशासन ने घटनास्थल का मुआयना कर मकान मालिक से मामले की विस्तृत जानकारी ली है।
दूसरी और अधिक गंभीर घटना तोपदड़ा फाटक के पास स्थित एक ऑयल-पेंट की दुकान में हुई, जहाँ शाम की पूजा के बाद जलती छोड़ी गई अगरबत्ती या दीपक ने विकराल रूप ले लिया। दुकान मालिक मूलचंद द्वारा पूजा कर दुकान बढ़ाने के बाद, वहां रखे थिनर और पेंट जैसे ज्वलनशील पदार्थों ने आग को तेजी से भड़का दिया। देखते ही देखते दुकान से धुएं का गुबार और लपटें निकलने लगीं, जिसे देख पड़ोसियों ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। थिनर और कंप्रेसर मशीन की मौजूदगी के कारण आग पर काबू पाना चुनौतीपूर्ण था, मगर फायर फाइटर्स की कड़ी मशक्कत ने आग को बाजार की अन्य दुकानों तक पहुँचने से पहले ही शांत कर दिया। इस अग्निकांड में दुकानदार को लाखों रुपये के सामान का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
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इन दोनों बैक-टू-बैक घटनाओं ने शहर में सुरक्षा मानकों और व्यक्तिगत सतर्कता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। फायर ब्रिगेड अधिकारियों और स्थानीय पुलिस ने जनता से पुरजोर अपील की है कि पूजा के बाद दीपक या अगरबत्ती को कभी भी असुरक्षित या लावारिस न छोड़ें, विशेषकर ऐसी जगहों पर जहाँ थिनर, पेंट या कपड़ा जैसी आग पकड़ने वाली वस्तुएं मौजूद हों। विशेषज्ञों के अनुसार, धार्मिक अनुष्ठानों के बाद दीये को सुरक्षित स्थान पर रखना या उसे बुझाकर ही परिसर छोड़ना अनिवार्य है ताकि इस तरह की लापरवाही किसी बड़े जान-माल के नुकसान का कारण न बने। फिलहाल दोनों क्षेत्रों में स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस आग के सटीक कारणों की गहनता से पड़ताल कर रही है।
