
संविधान की दुहाई और सरकार पर प्रहार
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर पंचायत और शहरी निकाय चुनावों में देरी कर रही है। सिविल लाइंस स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में गहलोत ने कहा कि जो लोग बाबा साहब भीमराव आंबेडकर की जयंती मना रहे हैं, उन्हें उनके बनाए संविधान में कोई आस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि समय पर चुनाव न कराकर सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों और संविधान की धज्जियां उड़ा रही है। गहलोत ने इस मामले में राष्ट्रपति और राज्यपाल से तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है।
”हार के डर से चुनाव टाल रही है भाजपा”: सचिन पायलट
वहीं, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने भी स्थानीय निकाय चुनावों में हो रही देरी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। पायलट ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी को चुनाव में अपनी हार का डर सता रहा है, इसलिए वह किसी न किसी बहाने चुनाव को आगे खिसकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को न तो अदालत के निर्देशों की परवाह है और न ही प्रदेश की जनता की। पायलट ने याद दिलाया कि उच्च न्यायालय ने चुनाव के लिए 15 अप्रैल तक की समयसीमा तय की थी, लेकिन सरकार की मंशा चुनाव कराने की नजर नहीं आ रही है।
मनरेगा और ग्रामीण विकास पर गहराया संकट
सचिन पायलट ने चुनावों में देरी का सीधा असर ग्रामीण विकास पर पड़ने की बात भी उठाई है। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों में निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के कारण महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत होने वाले कार्य ठप पड़ गए हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोजगार मिलने में भारी परेशानी हो रही है और विकास कार्य पूरी तरह से रुक गए हैं। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि जब तक जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल नहीं होगी, तब तक ग्रामीण जनता की समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।
नैतिक अधिकार और लोकतंत्र की मजबूती पर सवाल
अशोक गहलोत ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े करते हुए कहा कि यदि सरकार समय पर चुनाव कराने में विफल रहती है, तो उसे सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी के ‘संविधान बचाओ’ नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्तमान में लोकतंत्र कमजोर हो रहा है और संवैधानिक संस्थाओं का उल्लंघन किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं ने एकजुट होकर मांग की है कि लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए जल्द से जल्द चुनावों की घोषणा की जाए, ताकि जनता द्वारा चुनी गई स्थानीय सरकारें अपना काम सुचारू रूप से कर सकें।
