
दो बच्चों को खोने के बाद परिवार को मिली नई उम्मीद
राजस्थान की राजधानी जयपुर से चिकित्सा जगत को हैरान कर देने वाला एक सुखद मामला सामने आया है। यहाँ के प्रसिद्ध जेके लोन अस्पताल के डॉक्टरों ने एक ऐसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे नवजात को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया, जिसने इसी परिवार के दो मासूमों की जान पहले ही ले ली थी। परिवार के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि जिस बीमारी के कारण उन्होंने अपने दो बच्चों को महज 40 दिन की उम्र में खो दिया था, उसी बीमारी को डॉक्टरों ने इस बार मात्र 56 रुपये के कुल खर्च वाले इलाज से मात दे दी है।
खतरनाक स्तर पर था एएनसी काउंट
10 मार्च को जब परिजन नवजात को गंभीर स्थिति में अस्पताल लेकर पहुँचे, तो बच्चे का शरीर संक्रमण से लड़ने की पूरी क्षमता खो चुका था। मेडिकल जांच में सामने आया कि बच्चे का एब्सोल्यूट न्यूट्रोफिल काउंट (एएनसी) गिरकर मात्र 82 रह गया था। डॉक्टरों के अनुसार, यदि यह स्तर 500 से नीचे चला जाए, तो शरीर रोगों से लड़ने वाली कोशिकाएं बनाना बंद कर देता है और जान का खतरा बढ़ जाता है। निजी अस्पताल में सुधार न होने के बाद, जेके लोन के डॉक्टरों ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और बच्चे के बोन मैरो को सक्रिय करने की योजना बनाई।
14 रुपये की दवा और डॉक्टरों का सटीक निर्णय
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल जेनेटिक्स विभाग के प्रभारी डॉ. प्रियांशु माथुर और उनकी टीम ने तुरंत ‘हाइड्रॉक्सीकॉबालामिन’ इंजेक्शन से इलाज शुरू करने का फैसला किया। ताज्जुब की बात यह है कि इस जीवनरक्षक इंजेक्शन की कीमत मात्र 14 रुपये है। सप्ताह में एक बार दिए जाने वाले इस डोज ने ऐसा असर दिखाया कि बच्चे का एएनसी स्तर 82 से उछलकर सीधे 6000 के पार पहुँच गया। इस सस्ती लेकिन सटीक दवा ने बच्चे के शरीर में खून और रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाने वाली कोशिकाओं को दोबारा सक्रिय कर दिया।
दुनिया का दुर्लभतम मामला: अब तक केवल 60 केस
डॉ. प्रियांशु माथुर के अनुसार, यह बीमारी इतनी दुर्लभ है कि पूरी दुनिया में अब तक इसके केवल 60 के करीब मामले ही रिपोर्ट किए गए हैं। इस मामले में सबसे बड़ी सफलता समय रहते बीमारी की सही पहचान और तुरंत उपचार शुरू करना रही। यदि इलाज में थोड़ी भी देरी होती, तो परिणाम बेहद दुखद हो सकते थे। अब बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। डॉक्टरों की इस सूझबूझ ने न केवल एक मासूम की जान बचाई, बल्कि आधुनिक चिकित्सा के उस पहलू को भी उजागर किया जहाँ सही ज्ञान महंगी दवाओं से अधिक प्रभावी साबित होता है।
