
आर्ट प्रोजेक्ट के लिए हाथी को किया ‘पिंक’
राजस्थान की राजधानी जयपुर अपनी विरासत और हाथियों के लिए विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन हाल ही में एक विदेशी फोटोग्राफर का ‘क्रिएटिव प्रयोग’ विवादों के घेरे में आ गया है। बार्सिलोना में रहने वाली रूसी फोटोग्राफर जूलिया बुरुलेवा ने अपने एक आर्ट प्रोजेक्ट के लिए एक असली हाथी को पूरी तरह से चमकदार गुलाबी रंग में रंग दिया। हाथी की पीठ पर बैठी मॉडल और पारंपरिक राजस्थानी द्वारों के सामने ली गई ये तस्वीरें जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुईं, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। नेटिजन्स ने इसे कला के नाम पर मूक पशु के साथ खिलवाड़ और ‘एनिमल क्रूरता’ करार दिया है।
सांस्कृतिक प्रेरणा या महज ‘इंस्टाग्राम लाइक्स’?
फोटोग्राफर जूलिया ने इंस्टाग्राम पर सफाई देते हुए बताया कि वह जयपुर की संस्कृति और जीवंत रंगों से बेहद प्रभावित थीं। उनकी कल्पना में एक ‘पिंक सिटी’ के भीतर ‘गुलाबी हाथी’ का दृश्य था, जिसे वह हकीकत में उतारना चाहती थीं। उन्होंने दावा किया कि इस शूट के लिए उन्होंने कई एलीफेंट फार्म्स के चक्कर लगाए और हेरिटेज लोकेशंस पर अनुमति लेना उनके लिए एक बड़ी चुनौती थी। हालांकि, सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि महज कुछ ‘लाइक्स’ और अनोखी तस्वीरों के लिए एक जीवित प्राणी को ‘प्रॉप’ (सामग्री) की तरह इस्तेमाल करना नैतिक रूप से पूरी तरह गलत है।
ऑर्गेनिक रंगों का दावा, फिर भी भड़के लोग
जानवरों की सुरक्षा को लेकर उठे तीखे सवालों पर बुरुलेवा ने दलील दी कि हाथी पर इस्तेमाल किया गया गुलाबी रंग पूरी तरह ऑर्गेनिक (प्राकृतिक) और स्थानीय था, जिसका उपयोग त्योहारों में भी किया जाता है। उनके अनुसार, यह हाथी के लिए पूरी तरह सुरक्षित था और इसमें किसी रसायन का प्रयोग नहीं हुआ। इसके बावजूद, वन्यजीव प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क है कि पेंट करना और घंटों तक शूट के लिए जानवर को खड़ा रखना उसे मानसिक और शारीरिक तनाव देता है। कई यूजर्स ने सुझाव दिया कि अगर उन्हें केवल विजुअल्स ही चाहिए थे, तो वे आधुनिक AI तकनीक या फोटोशॉप का सहारा ले सकती थीं।
‘अतिथि देवो भव:’ बनाम गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार
इस विवाद ने एक बार फिर विदेशी पर्यटकों और कलाकारों द्वारा भारतीय प्रतीकों के इस्तेमाल पर नई बहस छेड़ दी है। आलोचकों का कहना है कि ‘क्रिएटिव आजादी’ का मतलब यह नहीं है कि आप किसी देश की परंपराओं और वहां के जीवों के प्रति संवेदनहीन हो जाएं। एक यूजर ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि भारत आकर हाथियों को पेंट करना ‘आर्ट’ नहीं बल्कि दुर्व्यवहार है। फिलहाल, जयपुर के पर्यटन हलकों और सोशल मीडिया पर इस फोटोशूट की कड़ी निंदा हो रही है, जिससे पर्यटन स्थलों पर ऐसे प्रयोगों के लिए जारी होने वाली अनुमतियों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
