
भारत की पहली महिला शिक्षिका का जन्मदिन इस बार अजमेर में पारंपरिक समारोहों से आगे बढ़कर ‘मानसिक स्वास्थ्य’ और ‘सामाजिक समावेशन’ जैसे गंभीर विषयों का गवाह बनेगा। सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय जागृति मंच ने इस बार केवल उत्सव को ही आधार नहीं बनाया है, बल्कि डॉ. अनीता गौतम और डॉ. मनीषा गौड जैसे विशेषज्ञों के माध्यम से अवसाद और पारिवारिक संबंधों की गुत्थियों को सुलझाने की पहल की है। कार्यक्रम की विशिष्टता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसमें समाज के सबसे उपेक्षित और विशेष वर्गों, जैसे लाड़लीघर की दृष्टिबाधित बालिकाओं और शुभदा संस्था के बच्चों को मुख्यधारा में शामिल कर उन्हें सम्मानित किया जाएगा। यह आयोजन सावित्रीबाई के उस दर्शन को जीवंत करता है जहाँ शिक्षा का अर्थ केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि हर वर्ग के लिए समान अवसर और संवेदना है।
किशनगढ़ की सड़कों पर दिखेगा नारी शक्ति का उत्साह; अजमेर में जुटेगा बौद्धिक समाज
किशनगढ़ और अजमेर की सरजमीं 3 जनवरी को सावित्रीबाई फुले के सम्मान में विभिन्न गतिविधियों से सराबोर रहेगी। जहाँ एक ओर किशनगढ़ में ‘सार्वजनिक मैराथन’ के जरिए सर्व समाज की एकता और स्वास्थ्य का संदेश पुरानी मिल चौराहे से डाक बंगला तक दौड़ेगा, वहीं अजमेर में विचारों का मंथन होगा। किशनगढ़ का आयोजन खेल भावना के साथ-साथ उन महान महिलाओं को भी नमन करेगा जिनके चित्र सेल्फी पॉइंट के माध्यम से युवाओं को प्रेरित करेंगे। इसके समानांतर, अजमेर में विधायक अनिता भदेल की अध्यक्षता में सावित्रीबाई फुले के आदर्शों को वर्तमान संदर्भों में ढालने की कोशिश की जाएगी। संस्था अध्यक्ष सुनीता चौहान के नेतृत्व में होने वाला यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि फुले के विचार आज भी समाज को एकजुट करने और पिछड़े वर्गों को गले लगाने के लिए सबसे प्रभावी माध्यम हैं।
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शिक्षा की जननी को नमन: अजमेर और किशनगढ़ में सेवा और स्वावलंबन के कार्यक्रमों की तैयारी
देश की प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की 195वीं जयंती के अवसर पर राजस्थान के अजमेर जिले में सेवा और स्वावलंबन का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। इस बार सावित्रीबाई फुले राष्ट्रीय मंच ने जयंती को जरूरतमंदों की सेवा से जोड़ते हुए लाड़लीघर और शुभदा संस्था के विशेष बच्चों के विकास में भागीदार बनने का निर्णय लिया है। कार्यक्रम में न केवल इन बच्चों को आवश्यक वस्तुएं प्रदान की जाएंगी, बल्कि डॉ. अनीता गौतम के व्याख्यान के जरिए समाज को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी किया जाएगा। दूसरी ओर, किशनगढ़ में माली समाज ने इस उत्सव को एक ‘सार्वजनिक मैराथन’ का रूप दिया है, जिसमें महिला और पुरुष वर्ग की प्रतिस्पर्धा के माध्यम से नारी सशक्तिकरण का बिगुल फूंका जाएगा। ये कार्यक्रम सामूहिक रूप से यह संदेश दे रहे हैं कि फुले के पदचिन्हों पर चलते हुए समाज आज भी हाशिए पर खड़े लोगों के उत्थान के लिए संकल्पबद्ध है।
