
DGFT-ICEGATE पोर्टल पर सेंधमारी
जयपुर पुलिस कमिश्नरेट ने एक ऐसे डिजिटल घोटाले का पर्दाफाश किया है जिसने सरकारी सुरक्षा तंत्र और तकनीक के दुरुपयोग की नई परतें खोल दी हैं। पुलिस ने पहली बार देश के बड़े ‘DGFT-ICEGATE स्क्रिप्ट घोटाले’ का खुलासा किया है, जिसमें करीब 400 करोड़ रुपये की हेराफेरी की आशंका जताई जा रही है। शातिर ठगों ने निर्यातकों (Exporters) को मिलने वाले सरकारी इंसेंटिव को अपना निशाना बनाया और सीधे सरकारी पोर्टल पर सेंधमारी कर करोड़ों रुपये डकार लिए। इस बड़े खुलासे के बाद जयपुर पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल और विशेष पुलिस आयुक्त ओम प्रकाश ने प्रेस वार्ता कर पूरे गिरोह के काम करने के तरीके की जानकारी साझा की।
फर्जी DSC और दुबई से कंट्रोल का खेल
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने इस महाघोटाले को अंजाम देने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया। उन्होंने फर्जी पैन और आधार कार्ड का उपयोग कर 400 से ज्यादा नकली डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) तैयार किए। इन फर्जी सिग्नेचर के जरिए गिरोह ने DGFT-ICEGATE पोर्टल पर लॉग-इन कर असली निर्यातकों के खातों तक अपनी पहुंच बनाई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ये डिजिटल सिग्नेचर भारत में बनाए जाते थे, लेकिन इन्हें दुबई में डाउनलोड किया जाता था। वहीं से बैठकर आरोपी असली एक्सपोर्टर्स के इंसेंटिव को चुपचाप दूसरे म्यूल खातों में ट्रांसफर कर देते थे।
सिर्फ एक खाते से उड़ाए 93 लाख रुपये
आरोपियों की चालाकी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने एक ही निर्यातक के खाते से करीब 93 लाख रुपये की बड़ी रकम पार कर दी। आरोपियों ने इस रकम को अलग-अलग म्यूल आईडी में ट्रांसफर किया ताकि पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए उन्हें ट्रैक करना नामुमकिन हो जाए। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने अब तक 400 से ज्यादा खातों में सेंध लगाई है। डिजिटल फ्रॉड के इस नए तरीके ने न केवल निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि सरकारी पोर्टल्स की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जोधपुर और पाली से 5 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए राजस्थान के अलग-अलग जिलों में दबिश दी। जोधपुर से सुल्तान खान, नंद किशोर, अशोक भंडारी और प्रमोद खत्री को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक अन्य आरोपी निर्मल सोनी को पाली से पकड़ा गया है। गिरफ्तार किए गए पांच में से चार आरोपी पेशेवर तरीके से डिजिटल सिग्नेचर बनाने का काम करते थे, जबकि एक आरोपी पूरे नेटवर्क को ऑपरेट करने और डाटा मुहैया कराने में लगा था। पुलिस का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस घोटाले का दायरा 400 करोड़ से भी ऊपर जा सकता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े कुछ और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
