
समृद्ध किसान परिवार की शैक्षिक विरासत से निकले डॉ. अम्बर पारे ने बहुआयामी उच्च शिक्षा के बाद दुलिया को बनाया अपने कार्य का आधार; आयुर्वेद, नेचुरोपैथी, योग-प्राणायाम, मर्म, मंत्र, स्वर सहित अनेक पारंपरिक पद्धतियों पर कार्य
हरदा जिले के ग्राम दुलिया की पहचान लंबे समय से कृषि और ग्रामीण जीवन से जुड़ी रही है। इसी परिवेश से निकलकर डॉ. अम्बर पारे ने उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न विषयों का अध्ययन करते हुए अपना कार्यक्षेत्र विकसित किया। आज दुलिया में स्थित डॉ. अम्बर पारे नेचुरोपैथी सेंटर उनके इसी बहुआयामी कार्य का प्रमुख आधार है।
डॉ. अम्बर पारे का संबंध हरदा जिले के एक प्रतिष्ठित और समृद्ध कृषक परिवार से है। उनके पिता स्वर्गीय राजेंद्र पारे नर्मदापुरम संभाग और हरदा जिले के प्रतिष्ठित एवं संपन्न किसानों में रहे। उन्होंने अपने दोनों बेटों की शिक्षा को विशेष महत्व दिया। परिवार के बड़े बेटे डॉ. अंकुर पारे और छोटे बेटे डॉ. अम्बर पारे ने आगे चलकर उच्च शिक्षा प्राप्त की और अपने-अपने क्षेत्रों में कार्य विकसित किया।
स्वर्गीय राजेंद्र पारे के लिए पारिवारिक समृद्धि के साथ शिक्षा भी अगली पीढ़ी की महत्वपूर्ण पूंजी थी। इसी वातावरण में पले-बढ़े डॉ. अम्बर पारे की आगे की यात्रा एक डिग्री तक सीमित नहीं रही, बल्कि विभिन्न विषयों में अध्ययन के साथ लगातार विस्तृत होती गई।
बहुआयामी शिक्षा से विकसित हुई कार्यदृष्टि-
डॉ. अम्बर पारे की शैक्षणिक यात्रा उनके वर्तमान कार्य को समझने की महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने BDS के बाद BNYS का अध्ययन किया और प्राकृतिक चिकित्सा तथा योग के क्षेत्र में आगे बढ़े।
इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य प्रशासन और मानवीय व्यवहार से जुड़े विषयों का भी अध्ययन किया। उनकी शैक्षणिक योग्यता में PGDHHM तथा PGDCFT शामिल हैं। इसके अलावा उनकी शिक्षा में Master in Alternative Medicine, Post Graduate Diploma in Infectious Diseases तथा Certificate in Diabetes Mellitus जैसे अध्ययन भी शामिल रहे हैं।
अलग-अलग विषयों में शिक्षा का यह विस्तार उनके काम में भी दिखाई देता है। स्वास्थ्य को केवल किसी एक पद्धति तक सीमित रखने के बजाय उन्होंने आयुर्वेद, नेचुरोपैथी, योग, जीवनशैली और भारतीय पारंपरिक ज्ञान की विभिन्न धाराओं को अपने कार्य के व्यापक दृष्टिकोण से जोड़ा।
इसी को वे Holistic Health यानी समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण के रूप में देखते हैं।
दुलिया में विकसित हुआ नेचुरोपैथी सेंटर-
2020 में ग्राम दुलिया, जिला हरदा में डॉ. अम्बर पारे नेचुरोपैथी सेंटर की स्थापना हुई। समय के साथ यहां आयुर्वेद, नेचुरोपैथी, योग एवं प्राणायाम के साथ विभिन्न पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों से जुड़े कार्यों का दायरा बढ़ता गया।
सेंटर में आयुर्वेद, नेचुरोपैथी, योग एवं प्राणायाम, मर्म चिकित्सा, मंत्र चिकित्सा, एक्यूप्रेशर, एक्यूपंक्चर, मैग्नेट थेरेपी, जड़ी-बूटियों से जुड़े पारंपरिक प्रयोग, आहार चिकित्सा, स्वर चिकित्सा तथा कुंडलिनी शक्ति से जुड़े अभ्यास जैसे विभिन्न आयामों पर कार्य किया जाता है।
इन सभी पद्धतियों की अपनी अलग पृष्ठभूमि और अवधारणाएं हैं। इन्हें एक ही चिकित्सा प्रणाली के रूप में देखना उचित नहीं होगा। डॉ. अम्बर पारे के कार्य में इनका साथ आना भारतीय स्वास्थ्य और जीवन-दृष्टि के विभिन्न आयामों को व्यापक संदर्भ में देखने की कोशिश के रूप में सामने आता है।
शरीर, जीवनशैली और आंतरिक आयाम पर समान ध्यान-
डॉ. अम्बर पारे के कार्य की खासियत इसकी बहुआयामी प्रकृति है। मर्म चिकित्सा, एक्यूप्रेशर और एक्यूपंक्चर जैसी पद्धतियां शरीर के विशिष्ट बिंदुओं से जुड़ी हैं। योग और प्राणायाम शरीर तथा श्वास के अनुशासन को सामने रखते हैं।

दूसरी ओर आहार चिकित्सा और जड़ी-बूटियों से जुड़े पारंपरिक प्रयोग स्वास्थ्य को दैनिक जीवन, भोजन और प्राकृतिक संसाधनों से जोड़ते हैं। मंत्र चिकित्सा और स्वर चिकित्सा भारतीय परंपरा में ध्वनि, स्वर और एकाग्रता से जुड़े आयामों को सामने लाती हैं, जबकि कुंडलिनी शक्ति से संबंधित अभ्यास भारतीय योग और आध्यात्मिक परंपरा के अलग पक्ष से जुड़े हैं।
इस व्यापक दृष्टिकोण के कारण डॉ. अम्बर पारे के कार्य को केवल नेचुरोपैथी तक सीमित करके देखना उसके पूरे स्वरूप को व्यक्त नहीं करता।
शिक्षा के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान-
डॉ. अम्बर पारे के कार्य को विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सम्मान और recognition मिला है।
उनकी उपलब्धियों में Fellow of the Royal Society of Medicine (FRSM) का उल्लेख प्रमुख है। इसके अलावा World Book of Records से recognition भी उनके professional profile का हिस्सा रहा है।
राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें G-20 Civil 20 Seva Summit Samman, Health Excellence Award और Health Care Award जैसे सम्मानों से सम्मानित किया गया है। Daily Bhaskar Healthcare Award 2023 भी उनके प्रमुख सम्मानों में शामिल है।
मध्य प्रदेश में भी उनके कार्य को विभिन्न अवसरों पर सम्मान मिला। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा सम्मानित किए जाने के साथ ही तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी और चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग द्वारा भी उन्हें सम्मान दिए जाने के अवसर रहे हैं।
इन सम्मानों को केवल पुरस्कारों की सूची के रूप में देखने के बजाय उनकी उस यात्रा के पड़ाव के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें उच्च शिक्षा, अलग-अलग स्वास्थ्य विषयों का अध्ययन और ग्रामीण क्षेत्र में निरंतर कार्य एक साथ दिखाई देते हैं।
गांव को ही बनाया अपने काम का आधार-
डॉ. अम्बर पारे की यात्रा का एक उल्लेखनीय पक्ष यह है कि उच्च शिक्षा और व्यापक पेशेवर अध्ययन के बाद भी उन्होंने अपने कार्य का आधार ग्राम दुलिया को बनाया।
आज जब विशेषज्ञ सेवाओं और आधुनिक सुविधाओं का बड़ा हिस्सा बड़े शहरों में केंद्रित दिखाई देता है, ऐसे समय में किसी ग्रामीण क्षेत्र से अपने काम को विकसित करना इस यात्रा को अलग संदर्भ देता है। दुलिया उनके लिए केवल पारिवारिक और ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़ा स्थान नहीं रहा, बल्कि उनके पेशेवर कार्य का भी महत्वपूर्ण आधार बना।
यहीं से डॉ. अम्बर पारे नेचुरोपैथी सेंटर की गतिविधियां आगे बढ़ीं और भारतीय पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों के विभिन्न आयामों से जुड़ा उनका काम व्यापक पहचान की ओर बढ़ा।
परंपरा और आधुनिक समय के बीच संवाद–
भारतीय पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों के प्रति आज देश और दुनिया में रुचि बढ़ रही है। लेकिन इस बढ़ती रुचि के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है। किसी पारंपरिक पद्धति, ऐतिहासिक मान्यता और आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाण के बीच अंतर को स्पष्ट रखना जरूरी है।
डॉ. अम्बर पारे का कार्य इसी व्यापक चर्चा का एक हिस्सा है, जिसमें आयुर्वेद, नेचुरोपैथी, योग, प्राणायाम, विभिन्न पारंपरिक therapies, आहार, जीवनशैली और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं के अलग-अलग पहलुओं को अपने कार्यक्षेत्र में स्थान दिया गया है।
दुलिया से शुरू हुई यह कहानी केवल एक व्यक्ति या एक सेंटर की कहानी नहीं है। इसमें एक समृद्ध किसान परिवार की शिक्षा-केंद्रित सोच, दो उच्च शिक्षित भाइयों की आगे बढ़ती यात्रा, एक ग्रामीण परिवेश में विकसित हुआ नेचुरोपैथी सेंटर और भारतीय पारंपरिक स्वास्थ्य ज्ञान के विभिन्न आयाम—सभी एक साथ दिखाई देते हैं।
डॉ. अम्बर पारे की शिक्षा, विविध विषयों में अध्ययन, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान और दुलिया में निरंतर कार्य—इन सबको साथ रखकर देखें तो उनकी यात्रा की खास बात यही दिखाई देती है कि उच्च शिक्षा और आधुनिक अध्ययन के बावजूद अपनी ग्रामीण जड़ों से जुड़कर अपने कार्य को आगे बढ़ाने की निरंतरता बनी रही।
दुलिया से व्यापक पहचान तक की यह यात्रा इसी मेल को सामने लाती है शिक्षा और परंपरा, आधुनिक अध्ययन और ग्रामीण जड़ें, तथा अपने क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए अपनी मूल भूमि से जुड़े रहने की कहानी।
