
शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक अध्याय
राजस्थान के अजमेर जिले के शैक्षिक इतिहास में जल्द ही एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। भजनलाल सरकार ने हाथीखेड़ा क्षेत्र में करीब 30 एकड़ भूमि पर एक अत्याधुनिक ‘बालिका सैनिक स्कूल’ के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। लगभग 20 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने शनिवार को सर्किट हाउस में उच्च स्तरीय बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि अप्रैल माह के भीतर ही इस स्कूल के ‘वर्क ऑर्डर’ जारी कर दिए जाएं, ताकि बेटियों को जल्द ही अनुशासनात्मक और गुणवत्तापूर्ण सैन्य शिक्षा का लाभ मिल सके।
मॉडल स्कूल की भवन समस्या का स्थायी समाधान
बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक और बड़ा निर्णय लेते हुए सुंदर विलास स्थित ‘मॉडल बालिका सीनियर सेकेंडरी स्कूल’ की पुरानी समस्या को सुलझा लिया गया है। इस स्कूल को अब सावित्री बालिका प्राथमिक विद्यालय के विशाल भवन में शिफ्ट किया जाएगा। इस फैसले से लगभग 300 छात्राओं को अन्य स्कूलों में मर्ज होने या दूर जाने की परेशानी से मुक्ति मिल जाएगी। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि नए भवन की ‘सेफ्टी ऑडिट’ पूरी हो चुकी है और जल्द ही रंग-रोगन व मरम्मत के बाद इसे छात्राओं के लिए एक बेहतर शैक्षणिक वातावरण के रूप में तैयार कर दिया जाएगा।
DMFT फंड से संवरेंगे सरकारी स्कूलों के कक्ष
अजमेर उत्तर क्षेत्र की सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए डीएमएफटी फंड से 5 करोड़ रुपए के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। देवनानी ने निर्देश दिए हैं कि बारिश के मौसम से पहले सभी जीर्ण-शीर्ण विद्यालयों और जर्जर कक्षों की मरम्मत का काम पीडब्ल्यूडी के माध्यम से पूरा किया जाए। सरकार की प्राथमिकता है कि बच्चों को किसी भी तरह के असुरक्षित भवन में न पढ़ाया जाए। इसके साथ ही विधायक कोष से होने वाले निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि सरकारी स्कूलों की तस्वीर पूरी तरह बदल सके।
बोर्ड परीक्षाओं और नामांकन पर विशेष फोकस
बैठक के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने केवल ढांचागत विकास ही नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता पर भी जोर दिया। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिए कि सरकारी स्कूलों के बोर्ड परीक्षा परिणामों में सुधार लाया जाए और अधिक से अधिक छात्र 75 प्रतिशत से ऊपर अंक प्राप्त करें। शिक्षकों को स्कूल समय के अतिरिक्त क्षेत्रों में संपर्क कर ‘नामांकन’ बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। लक्ष्य यह है कि आंगनबाड़ी से निकलने वाला हर बच्चा औपचारिक शिक्षा से जुड़े और कोई भी बेटी संसाधनों के अभाव में पढ़ाई से वंचित न रहे।
