
मेट्रो विस्तार और प्रधानमंत्री का आगामी दौरा
जयपुर शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली मेट्रो रेल अब आगरा रोड को जोड़ने के लिए तैयार है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विजन के अनुरूप, जून के आखिरी सप्ताह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जयपुर आकर मेट्रो फेज-2 का शिलान्यास कर सकते हैं। रिफाइनरी के उद्घाटन के बाद सरकार की यह सबसे बड़ी प्राथमिकता है। इस प्रोजेक्ट के शुरू होने से न केवल आगरा रोड बल्कि जयपुर के एक बड़े हिस्से को सुगम सार्वजनिक परिवहन का लाभ मिलेगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री एक विशाल जनसभा को भी संबोधित कर सकते हैं, जिसकी तैयारियां अभी से तेज कर दी गई हैं।
ट्रैफिक पुलिस का नया ढांचा और हाईटेक निगरानी
शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया गया है। अब जयपुर में एडीसीपी (ट्रैफिक) के पद 2 से बढ़ाकर 4 और एसीपी के पद 4 से बढ़ाकर 8 कर दिए गए हैं। इसका उद्देश्य हर पुलिस जिले में निगरानी और समन्वय को मजबूत करना है। तकनीक के स्तर पर भी जयपुर पुलिस अब ‘ड्रोन’ और ‘अभय कमांड सेंटर’ के जरिए जाम की स्थिति की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग करेगी। इसके अलावा, ट्रैफिक इंस्पेक्टर्स को 20 मॉडिफाइड मोटरसाइकिलें और नई सुविधाजनक वर्दी प्रदान की जाएगी, ताकि वे भीड़भाड़ वाले इलाकों में त्वरित कार्रवाई कर सकें।
मॉडल ट्रैफिक कॉरिडोर और इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार
ट्रैफिक प्रबंधन को जमीनी स्तर पर सुधारने के लिए टोंक रोड (यादगार से सांगानेर तक) को एक ‘मॉडल ट्रैफिक कॉरिडोर’ के रूप में विकसित किया जाएगा। यह कॉरिडोर भविष्य के लिए एक बेंचमार्क बनेगा, जहाँ सड़क डिजाइन में सुधार, असुरक्षित कट्स को बंद करने और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित फुटपाथ जैसे कार्य जेडीए और नगर निगम के समन्वय से किए जाएंगे। साथ ही, पूरे शहर को 72 ट्रैफिक बीट्स में बांटा गया है, जिससे पीक ऑवर्स के दौरान जवाबदेही तय होगी और यातायात संचालन में मानवीय हस्तक्षेप के साथ-साथ वैज्ञानिक पद्धतियों का भी समावेश होगा।
अतिक्रमण मुक्त सड़कें और आधुनिक आईटीएमएस
सरकार की इस विशेष कार्ययोजना में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) को चरणबद्ध तरीके से लागू करना शामिल है। ट्रैफिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिक्रमण हटाने और पार्किंग प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सार्वजनिक परिवहन के रूटों का पुन: संयोजन किया जाएगा ताकि सड़क पर निजी वाहनों का दबाव कम हो सके। अधिकारियों के लिए एक प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन प्रणाली भी लागू की जाएगी, जिससे काम में पारदर्शिता और गति आएगी। इन व्यापक सुधारों के बाद जयपुर की सड़कों पर न केवल जाम से मुक्ति मिलेगी, बल्कि यह शहर यातायात प्रबंधन के मामले में देश के अन्य महानगरों के लिए एक मिसाल बनेगा।
