
Image credit – Local 18
आस्था और अटूट भक्ति का अनूठा संगम
राजस्थान की राजधानी जयपुर के पास जोबनेर कस्बे में आज एक ऐसी शादी संपन्न होने जा रही है, जो आधुनिक दौर में ‘मीराबाई’ के युग की याद दिलाती है। इंदिरा कॉलोनी की रहने वाली 21 वर्षीय तमन्ना कंवर, जिन्हें क्षेत्र में ‘कलयुग की मीरा’ कहा जा रहा है, आज किसी युवक के साथ नहीं बल्कि साक्षात भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा के साथ विवाह बंधन में बंधेंगी। शारीरिक और मानसिक रूप से दिव्यांग होने के बावजूद तमन्ना की बचपन से ही कान्हा के प्रति अनन्य भक्ति रही है। इसी आस्था को देखते हुए उनके परिवार ने वैदिक रीति-रिवाजों के साथ यह दिव्य विवाह संपन्न कराने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
इशारों में संवाद और दादा का संकल्प
तमन्ना के पिता मंगलसिंह खंगारोत ने बताया कि उनकी बेटी शब्दों के बजाय इशारों में बात करती है, लेकिन भगवान कृष्ण की प्रतिमा को देखते ही उसके चेहरे पर अद्भुत प्रसन्नता झलकती है। तमन्ना की बढ़ती आयु और उसकी सेवा के प्रति समर्पण को देखते हुए उनके दादा शेरसिंह खंगारोत ने अपनी पोती का विवाह ‘ठाकुरजी’ से कराने का विचार रखा। माता-पिता डॉ. मंजू कंवर और मंगलसिंह ने भी सहर्ष अपनी बेटी के कन्यादान का संकल्प लिया। इस विवाह के लिए भगवान कृष्ण की स्वर्ण लेपित चांदी की प्रतिमा को ‘वर’ के रूप में तैयार किया गया है, जिनकी विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा के बाद फेरे संपन्न होंगे।
वृंदावन से आई सुहाग सामग्री और संतों का आशीष
इस आध्यात्मिक विवाह को भव्य और शास्त्रोक्त बनाने के लिए परिवार विशेष रूप से वृंदावन गया था। वहां भांडीर वन स्थित उस स्थान से सुहाग सामग्री और सिंदूर लाया गया है, जहां स्वयं ब्रह्माजी ने राधा-कृष्ण का विवाह संपन्न कराया था। परिवार ने विख्यात संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन कर इस आयोजन के लिए उनका आशीर्वाद भी प्राप्त किया। इस अनूठी शादी में बृजमंडल परिवार के गिरिराज शर्मा ‘नंद बाबा’ की भूमिका निभा रहे हैं, जो भगवान की ओर से बारात लेकर आएंगे। पूरा माहौल ऐसा है मानो द्वापर युग की कोई कथा जीवंत हो उठी हो।
आज निकलेगी कान्हा की बारात, 2 हजार मेहमान बनेंगे गवाह
विवाह की रस्में 30 मार्च से ही पीले चावल और ‘बन सांकड़ी’ के साथ शुरू हो चुकी हैं। आज, 2 अप्रैल को जोबनेर के ऐतिहासिक गढ़ परिसर स्थित केशवरायजी मंदिर से भगवान कृष्ण की भव्य बारात निकलेगी, जो गाजे-बाजे के साथ वधू पक्ष के निवास पहुंचेगी। दिनभर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पाणिग्रहण संस्कार होगा और अगले दिन विदाई की रस्म निभाई जाएगी। इस दिव्य विवाह में शामिल होने के लिए विभिन्न राजपूत परिवारों और पंडितों सहित करीब 2,000 मेहमानों को आमंत्रित किया गया है। यह आयोजन न केवल एक परिवार की आस्था का प्रतीक है, बल्कि समाज के लिए मानवीय संवेदनाओं और भक्ति का एक प्रेरक उदाहरण भी है।
