
राजस्थान में नए साल का जश्न इस बार पर्यटकों के लिए “खुशी” से ज्यादा “सिरदर्द” साबित हो रहा है। अगर आप भी इस समय राजस्थान घूमने का मन बना रहे हैं, तो रुकिए! वहां के हालात कुछ ऐसे हैं:
1. होटलों में ‘नो-वैकेंसी’, स्टेशन पर गुजरी रात
जयपुर से लेकर जैसलमेर तक, राजस्थान के लगभग सभी होटल और रिसॉर्ट्स पूरी तरह हाउसफुल हैं। आलम यह है कि हजारों पर्यटकों को रहने की जगह नहीं मिली और उन्हें कड़ाके की ठंड में रेलवे स्टेशन और पार्कों में रात बितानी पड़ी। जैसलमेर में तो अकेले न्यू ईयर पर करीब 70,000 सैलानी पहुंच गए, जिससे पूरा शहर जाम हो गया।
2. आसमान छूते दाम: 4 हजार का कमरा 25 हजार में!
भीड़ का फायदा उठाकर होटलों और रिसॉर्ट्स ने मनमाना किराया वसूलना शुरू कर दिया है।
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जो कमरा सामान्य दिनों में 4,000 रुपये का मिलता था, उसके लिए अब 25,000 रुपये तक मांगे जा रहे हैं।
जैसलमेर के रेतीले धोरों (सम और खुहड़ी) पर सफारी और कैंपिंग के पैकेज, जो पहले 5 हजार के थे, अब 15 से 25 हजार के पार पहुंच चुके हैं।
3. ‘पधारो म्हारे देश’ के नारे पर सवाल
पर्यटकों में प्रशासन और पर्यटन विभाग के प्रति काफी गुस्सा है। सैलानियों का आरोप है कि विभाग को पता था कि इतनी भीड़ आएगी, फिर भी रुकने के कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किए गए। सोशल मीडिया पर लोग इसे “लूट” बता रहे हैं और राज्य की छवि खराब होने की बात कह रहे हैं।
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4. फिर भी जश्न का माहौल
इन मुश्किलों के बावजूद, जैसलमेर के रेगिस्तान में उत्सव जैसा माहौल है।
विदेशी मेहमान: फ्रांस, जर्मनी, अमेरिका और इजराइल जैसे देशों से बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी यहां पहुंचे हैं।
मस्ती के साधन: सैंड ड्यून्स (रेत के टीलों) पर कैमल सफारी, जीप सफारी, पैरामोटरिंग और पैरासेलिंग का आनंद लिया जा रहा है। यहां दोपहर से लेकर देर रात 2 बजे तक रौनक बनी हुई है।
