
आधुनिक तेल उद्योग की शुरुआत और बाकू का दावा
आज की आधुनिक दुनिया में तेल के बिना जीवन की कल्पना करना मुश्किल है, लेकिन इसका इतिहास बेहद रोमांचक है। अगर मशीनों और यांत्रिक रूप से तेल निकालने की बात की जाए, तो दुनिया का सबसे पहला आधुनिक तेल का कुआं साल 1846 में अजरबैजान के बाकू शहर में खोदा गया था। बाकू के इसी कुएं को आधुनिक तेल उद्योग की नींव माना जाता है। हालांकि, व्यावसायिक स्तर पर इसे एक बड़े बिजनेस के रूप में स्थापित करने का श्रेय साल 1859 में अमेरिका के कर्नल एडविन ड्रेक को जाता है, जिन्होंने पेंसिल्वेनिया के टाइटसविले में तेल का कुआं खोदकर दुनिया का ध्यान इस कीमती ईंधन की ओर खींचा।
चीन का ‘बांस पाइप’ वाला प्राचीन विज्ञान
आपको जानकर हैरानी होगी कि आधुनिक मशीनों के आने से सैकड़ों साल पहले ही चीन ने तेल निकालने की तकनीक खोज ली थी। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, करीब 347 ईस्वी में चीन में लोग बांस के पाइपों का इस्तेमाल कर जमीन से तेल निकालते थे। उस समय इस तेल का उपयोग आज की तरह गाड़ियां चलाने के लिए नहीं, बल्कि नमक बनाने की प्रक्रिया में ईंधन के रूप में किया जाता था। यह दर्शाता है कि मानव सभ्यता ने बहुत पहले ही ‘ब्लैक गोल्ड’ की उपयोगिता को समझ लिया था, भले ही उसके तरीके आज की तुलना में बेहद साधारण थे।
भारत के डिगबोई में हाथी के पैरों से मिला सुराग
एशिया में तेल की खोज की कहानी में भारत का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। साल 1889 में असम के डिगबोई में एशिया का पहला व्यावसायिक तेल कुआं खोजा गया था। इसके पीछे की कहानी बहुत दिलचस्प है; कहा जाता है कि हाथियों के पैरों पर लगे तेल के धब्बे देखकर अंग्रेजों को वहां जमीन के नीचे तेल होने का संकेत मिला था। इसी खोज का नतीजा था कि साल 1901 में डिगबोई में एशिया की पहली ऑयल रिफाइनरी शुरू हुई, जो आज भी भारतीय तेल उद्योग के गौरवशाली इतिहास का हिस्सा है।
कनाडा, पोलैंड और यूरोप का योगदान
कच्चे तेल की खोज में कनाडा और पोलैंड का भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। अमेरिका से एक साल पहले यानी 1858 में कनाडा के ओंटारियो में जेम्स मिलर विलियम्स ने व्यावसायिक रूप से तेल निकालने में सफलता हासिल की थी। वहीं, यूरोप में तेल की खोज का श्रेय पोलैंड को जाता है, जहाँ 1854 में इग्नेसी लुकासिविज़ ने पहला कुआं खोदकर दुनिया को मिट्टी के तेल (केरोसिन) की शक्ति से परिचित कराया था। इन अलग-अलग देशों की खोजों ने मिलकर तेल को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया।
