
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) द्वारा वर्ष 2026 की कक्षा 12वीं (कॉमर्स विषय) की परीक्षा को धुलंडी जैसे बड़े सामाजिक पर्व के दिन आयोजित करने के निर्णय ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। आगामी 4 मार्च को होने वाली इस परीक्षा को लेकर संयुक्त अभिभावक संघ ने कड़ा विरोध जताते हुए इसे पूरी तरह से अव्यवहारिक और छात्र विरोधी बताया है। संघ ने बोर्ड अध्यक्ष को औपचारिक पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि होली के मुख्य त्योहार के दिन परीक्षा का आयोजन करना हजारों विद्यार्थियों की सुरक्षा और उनकी मानसिक एकाग्रता के साथ खिलवाड़ करने जैसा है। इस मांग के उठने के बाद अब शिक्षा जगत में बोर्ड के परीक्षा कैलेंडर को लेकर बहस तेज हो गई है।
अभिभावक संघ का तर्क है कि धुलंडी का पर्व राजस्थान की संस्कृति का अभिन्न अंग है, जिस दिन पूरे प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश का माहौल रहता है और सड़कों पर हुड़दंग व यातायात की अव्यवस्था एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे माहौल में परीक्षार्थियों का समय पर और सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुँचना न केवल कठिन होगा, बल्कि उनके मानसिक संतुलन पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। संघ के अनुसार, एक तरफ जहाँ विद्यार्थी परीक्षा के तनाव में होंगे, वहीं दूसरी तरफ चारों ओर त्योहार का शोर-शराबा उनकी एकाग्रता को भंग करेगा। संयुक्त अभिभावक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस असंवेदनशील निर्णय को नहीं बदला गया, तो यह विद्यार्थियों के भविष्य के साथ अन्याय होगा।
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प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा बोर्ड का यह कदम असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पूरा देश और प्रशासन उत्सव के माहौल में होता है, तब छात्रों को परीक्षा के दबाव में डालना किस हद तक उचित है। संघ का कहना है कि परीक्षा तिथियों का निर्धारण करते समय सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व के दिनों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। अभिभावकों ने मांग की है कि 4 मार्च की कॉमर्स विषय की परीक्षा को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए और बोर्ड एक ऐसी वैकल्पिक तिथि की घोषणा करे, जिससे छात्रों को बिना किसी बाहरी व्यवधान के परीक्षा देने का समान अवसर मिल सके।
इस पूरे मामले में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के हालिया फैसले का उदाहरण भी पेश किया जा रहा है। संयुक्त अभिभावक संघ ने बताया कि सीबीएसई ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए 4 मार्च को होने वाली अपनी परीक्षाओं के कार्यक्रम में पहले ही बदलाव कर दिया है। अभिभावकों का कहना है कि जब एक राष्ट्रीय स्तर का बोर्ड पर्व की महत्ता को समझते हुए तिथि बदल सकता है, तो राजस्थान बोर्ड को भी इसी राह पर चलते हुए छात्रों और अभिभावकों को मानसिक राहत प्रदान करनी चाहिए। भविष्य के लिए भी यह सुझाव दिया गया है कि परीक्षा कार्यक्रम तैयार करते समय धार्मिक और सामाजिक कैलेंडर का विशेष ध्यान रखा जाए ताकि ऐसी अप्रिय स्थितियाँ दोबारा उत्पन्न न हों।
फिलहाल, संयुक्त अभिभावक संघ की इस मांग ने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड पर दबाव बढ़ा दिया है। प्रदेश के हजारों कॉमर्स छात्र और उनके परिजन अब बोर्ड के अगले कदम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यदि बोर्ड इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं करता है, तो विरोध के स्वर और मुखर हो सकते हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए त्योहारों के दिनों को परीक्षा से मुक्त रखा जाना चाहिए ताकि विद्यार्थी बिना किसी तनाव के अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। अब सबकी निगाहें अजमेर स्थित बोर्ड मुख्यालय पर टिकी हैं कि क्या वह इस मांग को स्वीकार कर नया परीक्षा कार्यक्रम जारी करेगा।
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