
सरकारी भर्तियों में ‘दिव्यांग कोटे’ पर डाका
राजस्थान की सरकारी भर्तियों में एक के बाद एक हो रहे बड़े खुलासों की कड़ी में अब ‘फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र’ का एक चौंकाने वाला स्कैम सामने आया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित एसओजी (SOG) ने इस पूरे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसमें 40 प्रतिशत से कम दिव्यांगता होने के बावजूद दर्जनों अभ्यर्थियों ने आरक्षण का लाभ उठाकर नौकरियां हासिल कर लीं। जांच में सामने आया है कि इन जालसाजों ने डॉक्टरों और बिचौलियों के साथ सांठगांठ कर डिजिटल आईडी का दुरुपयोग किया और फर्जी तरीके से प्रमाण-पत्र जारी करवाए, जिससे पात्र और जरूरतमंद दिव्यांगों के हक पर डाका डाला गया।
SOG की रडार पर 2015 से 2023 की भर्तियां
एसओजी की अब तक की तफ्तीश में साल 2015 से लेकर 2023 के बीच हुई कई बड़ी और महत्वपूर्ण भर्तियां जांच के घेरे में आ गई हैं। इनमें रीट (REET-2022), स्कूल व्याख्याता, असिस्टेंट प्रोफेसर, ग्राम विकास अधिकारी (VDO), और एएनएम (ANM) जैसी प्रमुख परीक्षाएं शामिल हैं। एडीजी विशाल बंसल के अनुसार, एसओजी को 27 गंभीर शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद संदिग्ध पाए गए 44 अभ्यर्थियों का सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के मेडिकल बोर्ड से दोबारा परीक्षण कराया गया। रिपोर्ट में यह कड़वा सच सामने आया कि ये अभ्यर्थी शारीरिक रूप से पूरी तरह सक्षम थे या तय मानक से कम दिव्यांग थे।
डॉक्टरों और बिचौलियों के ‘नेक्सस’ पर शिकंजा
इस फर्जीवाड़े में केवल अभ्यर्थी ही नहीं, बल्कि उन पर मुहर लगाने वाले सफेदपोश डॉक्टर और सौदेबाजी करने वाले बिचौलिए भी बराबर के साझीदार निकले। एसओजी ने इस मामले में डॉ. रामलाल, डॉ. संकनालाल मीणा और डॉ. प्रकाश कुमार वर्मा सहित कई चिकित्सा अधिकारियों और सवाई सिंह गुर्जर जैसे बिचौलियों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों ने सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर स्वस्थ लोगों को कागजों में ‘बहरा’ या ‘लोकोमोटर दिव्यांग’ बना दिया था। इस कार्रवाई के बाद से चिकित्सा विभाग और प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा हुआ है।
निरस्त होंगी नियुक्तियां, होंगे नए खुलासे
एसओजी की इस कड़ी कार्रवाई के बाद अब फर्जी तरीके से चयनित हुए अभ्यर्थियों की नियुक्तियां निरस्त करने और उनसे वेतन वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है। तगाराम, किशोर सिंह, ललिता और पिंकी कुमारी जैसे दो दर्जन से अधिक अभ्यर्थियों पर कानूनी शिकंजा कस चुका है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पूछताछ के दौरान कुछ और बड़े नामों और सरकारी विभागों के अधिकारियों की संलिप्तता उजागर हो सकती है। एसओजी का यह कदम भविष्य की परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने और वास्तविक दिव्यांगों को उनका हक दिलाने की दिशा में एक बड़ी जीत माना जा रहा है।
