
अहिंसा और करुणा के रंग में रंगा राजस्थान
जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती पर पूरा राजस्थान भक्ति और आत्म-कल्याण के रंग में सराबोर नजर आ रहा है। 30 और 31 मार्च को प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में ‘अहिंसा परमो धर्म:’ और ‘जियो और जीने दो’ के अमर संदेश गूंज रहे हैं। मरुधरा की माटी में इस उत्सव को जिस भव्यता और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाता है, वह न केवल जैन समाज बल्कि सर्वसमाज के लिए आकर्षण का केंद्र होता है। राजधानी जयपुर से लेकर सूर्य नगरी जोधपुर तक, केसरिया ध्वजों और प्रभात फेरियों के साथ भगवान महावीर के सिद्धांतों को याद किया जा रहा है।
करौली का ‘श्री महावीरजी’ मेला: सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल
राजस्थान में महावीर जयंती का मुख्य केंद्र करौली जिले में गंभीर नदी के तट पर स्थित ‘श्री महावीरजी’ मंदिर है। यहाँ लगने वाला ऐतिहासिक मेला राजस्थान की अनूठी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। मेले की सबसे खास विशेषता भगवान की वह विशाल रथ यात्रा है, जिसमें जैन धर्मावलंबियों के साथ-साथ स्थानीय मीणा और गुर्जर समुदाय के लोग भी पूरी श्रद्धा से भाग लेते हैं। लकड़ी के नक्काशीदार भव्य रथ को खींचने के लिए उमड़ने वाला जनसैलाब और ग्रामीण परिवेश की लोक विधाएं यहाँ के वातावरण को जीवंत बना देती हैं, जो आपसी भाईचारे की एक बेमिसाल तस्वीर पेश करती है।
केसरिया जुलूस और 108 कलशों से महाअभिषेक
जयपुर के जौहरी बाजार और बापू बाजार जैसे पुराने इलाकों में मंगलवार सुबह से ही शोभायात्राओं का रेला दिखाई देगा। सजे-धजे हाथी, घोड़े और बैंड-बाजे के साथ निकलने वाले इन जुलूसों में श्रद्धालु केसरिया वस्त्र पहनकर शामिल होते हैं। वहीं, जोधपुर और उदयपुर के प्राचीन जैन मंदिरों में भगवान महावीर की प्रतिमा का ‘108 कलशों’ से मंगल अभिषेक किया जा रहा है। शाम के समय मंदिरों और नसियों में सांस्कृतिक संध्याओं का आयोजन होगा, जहाँ नन्हे बच्चों द्वारा भगवान महावीर के जीवन प्रसंगों पर आधारित नाटकों के जरिए शांति और सद्भाव का संदेश दिया जाएगा।
जीव दया और सेवा का अनूठा संकल्प
राजस्थान में यह पर्व केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘जीव दया’ और ‘सेवा’ के संकल्प का दिन भी है। इस अवसर पर प्रदेश की विभिन्न गौशालाओं में गायों को लापसी खिलाई जा रही है और पक्षियों के लिए परिंडों का वितरण किया जा रहा है। तपती गर्मी को देखते हुए जगह-जगह ठंडे पानी और शरबत की छबीलें लगाई गई हैं, जो राजस्थानी सेवा भाव का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। कई शहरों में ‘अहिंसा मार्च’ निकालकर पर्यावरण संरक्षण और व्यसन मुक्ति का आह्वान किया जा रहा है, जो वर्तमान समय में भगवान महावीर के सिद्धांतों की प्रासंगिकता को और बढ़ा देता है।
