
सूरत के एंटरटेनमेंट कारोबारी रजत राजेश महिंद्रू को बड़ा कानूनी झटका लगा है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने उनकी कंपनी Woop Amusement Private Limited के मौजूदा बैंक खातों को फिलहाल फ्रीज रखने का आदेश दिया है। यह मामला करोड़ों रुपये के निवेश विवाद से जुड़ा है।
रजत महिंद्रू और उनके परिवार के खिलाफ दिल्ली, सूरत और पुणे में अलग-अलग मामलों की जांच चल रही है। इन मामलों में कथित तौर पर फर्जी शेयर सर्टिफिकेट, कंपनी के पैसों का गलत इस्तेमाल, मनी लॉन्ड्रिंग और घरेलू हिंसा जैसे आरोप शामिल हैं।
कर्नाटक हाई कोर्ट में यह मामला Commercial Appeal No. 349 of 2026 के तहत सामने आया। यह अपील Purple Rock Infra Private Limited की ओर से दायर एक कमर्शियल केस से जुड़ी थी। जस्टिस D.K. Singh और जस्टिस H. Shanthi Bhushan की डिवीजन बेंच ने 2025 के एक शेयरहोल्डिंग एग्रीमेंट के तहत किए गए ₹10 करोड़ के भुगतान का भी संज्ञान लिया।
कोर्ट ने रजत महिंद्रू को विवादित 2.5% इक्विटी शेयर Purple Rock को एक सप्ताह के भीतर ट्रांसफर करने का निर्देश दिया। हालांकि यह ट्रांसफर अंतिम फैसले के अधीन रहेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने Woop Amusement के HDFC Bank और ICICI Bank में मौजूद करंट अकाउंट्स में रखी रकम को ट्रायल पूरा होने तक फ्रीज रखने का आदेश दिया।
रजत महिंद्रू Woop और Let’s Jump ब्रांड के तहत फैमिली एंटरटेनमेंट सेंटर और ट्रैम्पोलिन पार्क चलाने के लिए जाने जाते हैं। इस मामले में उनकी मां निशा महिंद्रू और बहन रिचा राजेश महिंद्रू के नाम भी सामने आए हैं। दोनों पर कथित तौर पर इन कारोबारों में सहयोग करने और उन्हें कारोबारी रूप से विश्वसनीय दिखाने में मदद करने के आरोप हैं।
₹6.12 करोड़ के निवेश से जुड़ा पहला मामला
दिल्ली EOW में दर्ज FIR No. 0074/2026 Apogee Enterprises Private Limited की शिकायत पर आधारित है।
शिकायत के अनुसार, रजत महिंद्रू ने 2024 के अंत से 2025 के बीच एक सूचीबद्ध कंपनी के वारंट खरीदने के लिए ₹6.12 करोड़ से अधिक लिए थे। कथित तौर पर यह कहा गया था कि बाद में बदले गए इक्विटी शेयरों को निवेश की सुरक्षा के रूप में वापस दिया जाएगा।
एक्सचेंज फाइलिंग में वारंट के शेयरों में बदलने की जानकारी सामने आई, लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि शेयर न तो गिरवी रखे गए और न ही उन्हें सौंपा गया। ब्याज सहित कुल नुकसान करीब ₹6.86 करोड़ बताया गया है।
बेंगलुरु प्रोजेक्ट में ₹14.51 करोड़ के निवेश का आरोप
दूसरा मामला EOW Delhi FIR No. 0075/2026 है। यह शिकायत Purple Rock Infra Private Limited के निदेशकों ने दर्ज कराई है।
मामला बेंगलुरु में एक फैमिली एंटरटेनमेंट सेंटर (FEC) बनाने की योजना से जुड़ा है। निवेशकों का आरोप है कि कई महीनों तक हुई बैठकों और साइट विजिट के बाद उन्हें निवेश के लिए तैयार किया गया।
अक्टूबर 2024 से निवेशकों ने करीब ₹4.51 करोड़ लगाए। इसके बाद प्रोजेक्ट का अनुमानित बजट ₹31 करोड़ से बढ़ाकर ₹40 करोड़ कर दिया गया। आरोप है कि निवेश को बचाने के लिए निदेशकों पर अतिरिक्त ₹10 करोड़ लगाने का दबाव बनाया गया।
इस तरह निवेशकों का कुल पैसा करीब ₹14.51 करोड़ हो गया।
निवेशकों द्वारा कराए गए एक फोरेंसिक ऑडिट, जिसकी तारीख 12 जनवरी 2026 बताई गई है, में कथित तौर पर बिना रिकॉर्ड के नकद लेनदेन और पैसों के गलत इस्तेमाल की जानकारी सामने आई। ऑडिट के अनुसार कंपनी में कुल मिलाकर ₹43 करोड़ से अधिक की रकम के कथित तौर पर गलत इस्तेमाल की बात सामने आई।
इसी दौरान बेंगलुरु की प्रॉपर्टी पर बिल्डिंग और पर्यावरण से जुड़ी मंजूरियां पूरी न होने के कारण स्थानीय प्रशासन की ओर से सील किए जाने का खतरा भी बताया गया।
सूरत के कारोबारी ने भी लगाया फर्जी दस्तावेजों का आरोप
तीसरी शिकायत सूरत के कारोबारी सदानंद मंध्यान ने 14 अप्रैल 2026 को वेसू पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई।
इस मामले में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है। इनमें SH-1 शेयर सर्टिफिकेट और SH-4 शेयर ट्रांसफर फॉर्म शामिल हैं।
शिकायत के अनुसार, इन दस्तावेजों के जरिए ऐसी शेयरहोल्डिंग दिखाई गई जो वास्तव में कंपनी के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) के पास दर्ज या रजिस्टर नहीं हुई थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उनकी पत्नी के निशा महिंद्रू से संबंधों के कारण उन्हें इस निवेश से जुड़ने का अवसर मिला। उन्होंने 2024 से 2025 के बीच बेंगलुरु प्रोजेक्ट के लिए करीब ₹6.35 करोड़ दिए। आरोप है कि इसके बदले Woop Amusement Private Limited में शेयर देने की बात कही गई, लेकिन शेयर कानूनी रूप से आवंटित नहीं किए गए।
निवेशकों तक पहुंचने के लिए सामाजिक संपर्कों का इस्तेमाल करने का आरोप
परिवार के कारोबार से परिचित लोगों के अनुसार, निवेशकों से संपर्क करने के लिए सामाजिक संबंधों का भी इस्तेमाल किया जाता था।
आरोप है कि निशा महिंद्रू हाई-नेट-वर्थ महिलाओं के किटी पार्टी सर्कल के जरिए संभावित निवेशकों से संपर्क करती थीं। वहीं रिचा महिंद्रू अपने सैलून और जिम से जुड़े संपर्कों के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए जोड़ती थीं।
कुछ स्थानीय लोगों ने परिवार से जुड़े पुराने विवादों का भी जिक्र किया है। इनमें सोने, नकदी और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े कथित लेनदेन के आरोप शामिल हैं। इसके अलावा 2018-19 में सूरत में एक कथित नारकोटिक्स जांच का भी उल्लेख किया गया है, हालांकि इससे जुड़ी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
परिवार के Sangini Solitaire स्थित फ्लैट को लेकर भी सवाल उठे हैं। बताया जाता है कि यह फ्लैट रिचा को तलाक के बाद गुजारा भत्ते (अलिमनी) के रूप में मिला था। हालांकि इस मामले में लगाए गए कुछ आरोपों को दूसरी तरफ से कथित तौर पर झूठा बताया गया था।
पत्नी ने पुणे में भी दर्ज कराया आपराधिक मामला
रजत महिंद्रू की अलग रह रही पत्नी तनमयी सुनील गांधी ने भी 6 मार्च 2026 को पुणे के स्वारगेट पुलिस स्टेशन में एक आपराधिक मामला दर्ज कराया।
FIR No. 0046/2026 में रजत महिंद्रू, निशा महिंद्रू, रिचा महिंद्रू, दूसरी बहन श्रुति नंदवानी और भाई-इन-लॉ कपिल नंदवानी के नाम शामिल हैं।
FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत कथित क्रूरता, मारपीट, धमकी और यौन उत्पीड़न/निजता से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। इसमें IT Act की Section 66E के तहत बिना सहमति के तस्वीरें या निजी तस्वीरें लेने से संबंधित आरोप भी शामिल हैं।
कई एजेंसियां कर रही हैं जांच
कर्नाटक हाई कोर्ट के बैंक अकाउंट फ्रीज करने के आदेश के बाद मामले की जांच और तेज हो गई है।
दिल्ली की Economic Offences Wing (EOW) के साथ-साथ सूरत पुलिस, पुणे पुलिस और Enforcement Directorate (ED) भी अलग-अलग पहलुओं की जांच कर रही हैं।
मामले में जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, वे आरोपों से जुड़े मामलों में जांच का सामना कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके सूरत स्थित ज्ञात पतों पर उनसे संपर्क नहीं हो पाया है।
