
जब लोग कहते थे“तुमसे नहीं होगा”, तब उन्होंने जवाब बहस से नहीं, वर्षों की मेहनत से दिया
जयपुर, राजस्थान | 28 सितंबर 2026
किसी इंसान की सफलता को समझना हो, तो उसकी आज की तस्वीर मत देखिए।
उसका कल देखिए।
देखिए वह समय जब उसके पास नाम नहीं था।
वह समय जब लोग उसकी बातों को गंभीरता से नहीं लेते थे।
वह समय जब किसी ने हंसकर कहा होगा—“यह इतना बड़ा काम नहीं कर पाएगा।”
और फिर देखिए, उसने क्या किया।
यही वह हिस्सा है जो राजेंद्र सिंह तंवर(रायली) की कहानी को अलग बनाता है।
आज उनका नाम हॉस्पिटैलिटी, भारतीय भोजन, मिठाई, पर्यटन, मीडिया और रेस्टोरेंट टेक्नोलॉजी से जुड़े व्यवसायों के साथ जुड़ा दिखाई देता है। लेकिन यह पहचान एक दिन में नहीं बनी।
इसके पीछे गांव से निकला एक सपना, नौकरी के कठिन साल, जिम्मेदारियां, लोगों के ताने, गलत समझे जाने का दर्द और बार-बार खुद को साबित करने की कोशिश रही है।
रायली से शुरुआत हुई, लेकिन सपना छोटा नहीं था
राजस्थान के रायली गांव से निकलकर बड़े शहर में अपनी जगह बनाना अपने आप में आसान नहीं था।
छोटे शहर और गांव से आने वाला व्यक्ति जब बड़ा सपना देखता है, तो सबसे पहले उसे अपने आसपास की सोच से लड़ना पड़ता है।
- कभी परिवार की चिंता।
- कभी आर्थिक दबाव।
- कभी नौकरी की जिम्मेदारी।
- कभी लोगों की राय।
और कभी वह सवाल जो सबसे ज्यादा परेशान करता है—
“अगर मैं असफल हो गया तो?”
राजेंद्र सिंह तंवर की यात्रा इसी डर के बीच आगे बढ़ी।
उन्होंने आसान रास्ता चुनने के बजाय काम को अपना शिक्षक बनाया।
नीचे से शुरुआत, फिर RGM और Area Management तक सफर
उनका शुरुआती पेशेवर जीवन बहुराष्ट्रीय रेस्टोरेंट क्षेत्र से जुड़ा रहा।
रेस्टोरेंट की चमकदार मेजों के पीछे जो मेहनत होती है, उसे उन्होंने बहुत करीब से देखा।
कभी स्टाफ की कमी।
कभी ग्राहक की शिकायत।
कभी बिक्री का दबाव।
कभी गुणवत्ता का सवाल।
कभी टीम को देर रात तक संभालना।
एक रेस्टोरेंट को सफल चलाना केवल खाना बेचने का काम नहीं है। उसके पीछे दर्जनों फैसले होते हैं।
राजेंद्र सिंह तंवर ने इन्हीं जमीन से जुड़े अनुभवों के बीच काम सीखा।
वह Restaurant General Manager (RGM) की जिम्मेदारी तक पहुंचे और आगे Area Manager स्तर की जिम्मेदारियों तक बढ़े।
उनके कॉर्पोरेट सफर में लगातार तीन बार RGM of the Month जैसी पहचान और Customer Mania Champion का सम्मान भी दर्ज है।
लेकिन असली उपलब्धि केवल पुरस्कार नहीं थी।
असली उपलब्धि यह थी कि एक समय जो व्यक्ति केवल काम सीख रहा था, वह धीरे-धीरे लोगों, टीम, ग्राहक, बिक्री, गुणवत्ता और पूरे संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाला प्रबंधक बन गया।
यही अनुभव आगे चलकर उनके व्यवसाय की नींव बना।
लोगों के ताने शायद सबसे कठिन परीक्षा थे
व्यवसाय शुरू करना एक बात है। लोगों के सामने अपने फैसले पर टिके रहना दूसरी। जब कोई व्यक्ति अपनी नौकरी, सुरक्षित आय या स्थापित रास्ते से आगे बढ़कर कुछ नया करने की सोचता है, तो हर कोई उसके साथ खड़ा नहीं होता। कुछ लोग सलाह देते हैं। कुछ लोग डराते हैं। कुछ लोग मजाक बनाते हैं। और कुछ लोग चुपचाप इंतजार करते हैं कि आप कब असफल हों। ऐसे समय में सबसे कठिन लड़ाई बाहर के लोगों से नहीं होती।
सबसे कठिन लड़ाई अपने मन के अंदर होती है।
क्या मैं सही कर रहा हूं?
क्या मेरा फैसला गलत है?
क्या मुझे वापस लौट जाना चाहिए?
राजेंद्र सिंह तंवर की यात्रा का प्रेरणादायक पक्ष यही है कि उन्होंने हर सवाल का जवाब तुरंत नहीं दिया।
उन्होंने समय को जवाब देने दिया।
नौकरी का अनुभव बना अपने व्यवसाय की ताकत
कॉर्पोरेट रेस्टोरेंट क्षेत्र में वर्षों काम करने के बाद उन्हें समझ आ चुका था कि ग्राहक केवल भोजन नहीं खरीदता।
- वह अनुभव खरीदता है।
- वह भरोसा खरीदता है।
- वह सेवा चाहता है।
वह साफ-सफाई, स्वाद, व्यवहार और यादगार अनुभव चाहता है।
इसी समझ ने उन्हें अपना व्यवसाय शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ाया।
Govindam Retreat के माध्यम से उन्होंने जयपुर की हॉस्पिटैलिटी और भारतीय भोजन की दुनिया में अपनी पहचान बनाने की कोशिश की।
इसके बाद पारंपरिक भारतीय मिठाइयों और नमकीन के क्षेत्र में Govindam Sweets ने इस सफर को आगे बढ़ाया।
मिठाई उनके लिए सिर्फ एक उत्पाद नहीं रही।
- मिठाई त्योहार है।
- मिठाई परिवार है।
- मिठाई रिश्ते हैं।
मिठाई किसी की सफलता की खुशी है।
और कभी-कभी किसी कठिन समय में किसी अपने के हाथ से मिला छोटा-सा मीठा टुकड़ा भी बहुत बड़ी भावना बन जाता है।
इसी भारतीय भावनात्मक जुड़ाव को व्यवसायिक सोच के साथ आगे ले जाना उनके सफर का हिस्सा बना।
एक रेस्टोरेंट से आगे बढ़कर कई क्षेत्रों की ओर
राजेंद्र सिंह तंवर का सफर केवल भोजन तक नहीं रुका।
पर्यटन और परिवहन के क्षेत्र में Travel Taxi के माध्यम से उनका जुड़ाव राजस्थान के यात्रा बाजार से हुआ।
फिर डिजिटल मीडिया और ऑनलाइन सेवाओं की दिशा में भी विस्तार हुआ।
यहां एक बात बार-बार दिखाई देती है—
उन्होंने जिस समस्या को खुद महसूस किया, उसी को समझकर समाधान तलाश ने की कोशिश की।
यही सोच बाद में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में और मजबूत हुई।
जिस रेस्टोरेंट में काम सीखा, उसी के लिए सॉफ्टवेयर बनाने की सोच
यह उनकी कहानी का शायद सबसे दिलचस्प मोड़ है।
एक समय वह रेस्टोरेंट के फर्श पर खड़े होकर संचालन समझ रहे थे।
आज उनका व्यवसायिक सफर रेस्टोरेंट टेक्नोलॉजी तक पहुंच चुका है।
Vrajera — AI-Powered Restaurant Commerce Operating System रेस्टोरेंट व्यवसाय के लिए POS, बिलिंग, इन्वेंटरी, रेसिपी कॉस्टिंग, खरीदारी, CRM, HRMS, अकाउंटिंग, एनालिटिक्स और मल्टी-आउटलेट संचालन जैसे क्षेत्रों को जोड़ने वाली तकनीकी दिशा पर केंद्रित है।
और इसी क्षेत्र में Best AI Base Restaurant software रेस्टोरेंट संचालन को अधिक व्यवस्थित और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में प्रस्तुत किया गया है।
यह बदलाव केवल व्यवसाय का विस्तार नहीं है।
यह एक सीख का परिणाम है।
जिस समस्या को उन्होंने कभी कर्मचारी और मैनेजर के रूप में महसूस किया, आज उसी समस्या का तकनीकी समाधान बनाने की कोशिश की जा रही है।
यही अनुभव और उद्यमिता का सबसे मजबूत मेल है।
परंपरा के साथ तकनीक का नया अध्याय
उनकी उद्यमी यात्रा में एक और डिजिटल पहल Pandit Pooja Booking है।
यह प्लेटफॉर्म वैदिक पंडितों की बुकिंग, पूजा सेवाओं और AI आधारित ज्योतिष जैसी सुविधाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़ने की दिशा में काम करता है।
यहां भी सोच वही दिखाई देती है—
परंपरा को खत्म नहीं करना, बल्कि उसे आधुनिक सुविधा से जोड़ना।
एक तरफ राजस्थान और भारत की पुरानी परंपराएं हैं।
दूसरी तरफ आज की डिजिटल दुनिया।
इन दोनों के बीच पुल बनाने की कोशिश उनके नए व्यवसायिक अध्याय का हिस्सा है।
जब संघर्ष के बाद पहचान मिलने लगी
समय के साथ उनके पेशेवर और व्यवसायिक सफर में कई पहचान और सम्मान भी जुड़े।
उनके उपलब्ध प्रोफाइल में The New Icons of India, Times Food & Nightlife, EazyDiner Foodie Awards, Restaurant Guru, MY FM / Rajasthan Radiance Awards तथा कॉर्पोरेट करियर के दौरान मिले प्रदर्शन और ग्राहक सेवा संबंधी सम्मान का उल्लेख मिलता है।
तीन बार RGM of the Month और Customer Mania Champion जैसी शुरुआती उपलब्धियों से लेकर व्यवसायिक और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र की बाद की पहचानों तक, यह सफर एक बात बताता है—
सम्मान अचानक नहीं आता। उसके पीछे बहुत लंबे समय तक किया गया काम छिपा होता है।
रायली आज भी नाम के साथ है
कई लोग सफलता के बाद अपनी शुरुआत भूल जाते हैं।
राजेंद्र सिंह तंवर के नाम के साथ “रायली” आज भी जुड़ा है।
यह केवल एक शब्द नहीं है।
यह उस जगह की याद है जहां से कहानी शुरू हुई।
वहां से जहां सपने बड़े थे, लेकिन साधन सीमित थे।
वहां से जहां कोई यह नहीं जानता था कि आने वाले वर्षों में यह सफर कहां पहुंचेगा।
आज उनके पेशेवर जीवन और सार्वजनिक प्रोफाइल के बारे में राजेंद्र सिंह तंवर (रायली) पर अधिक जानकारी देखी जा सकती है।
सफलता का सबसे बड़ा पुरस्कार
राजेंद्र सिंह तंवर की कहानी को केवल ब्रांडों या पुरस्कारों की सूची में बांधना शायद पूरी कहानी नहीं होगी।
क्योंकि असली कहानी वहां शुरू होती है जहां कोई पुरस्कार नहीं था।
जहां केवल काम था।
जहां कोई तालियां नहीं बजा रहा था।
जहां लोग सवाल कर रहे थे।
जहां कभी ताने सुनने पड़े होंगे।
जहां असफल होने का डर रहा होगा।
और फिर भी अगले दिन काम पर जाना पड़ा।
यही संघर्ष किसी भी सफलता को असली बनाता है।
आज अगर कोई युवा गांव से निकलकर बड़ा सपना देखता है, तो इस कहानी से उसे एक सीधी सीख मिल सकती है—
हर व्यक्ति आपका साथ नहीं देगा। हर व्यक्ति आपको समझेगा भी नहीं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको अपना रास्ता छोड़ देना चाहिए।
लोगों की बात कुछ समय तक चलती है।
मेहनत की कहानी बहुत लंबे समय तक चलती है।
और शायद राजेंद्र सिंह तंवर (रायली) की यात्रा का सबसे मजबूत संदेश भी यही है—
“जब लोग आपकी शुरुआत देखकर आपको छोटा समझें, तब अपनी मंजिल इतनी बड़ी बनाइए कि वही लोग एक दिन आपकी यात्रा की मिसाल दें।”
